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आतंक के खिलाफ अब हो आरपार की लडाई

एक बार फ़िर आतंकियों ने देश की धड़कन मुंबई को लहूलुहान किया और हम कुछ नही कर पाए। हमारे नेता इसमे भी एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाकर राजनीति करने से नही चुके। अब तक के इस सबसे बड़े आतंकी हमले में १८३ लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी, २५० से अधिक गयल हुए। इन सबसे बड़ी बात हमने अपने बेशकीमती जवान व अफसर गंवाए। इनकी भरपाई कभी नही हो सकती। अब समय आ गया है कि आतंकवाद के खिलाफ आर-पार कि लडाई शुरू करें। हमें इसके खिलाफ एकजुट होकर इस्रायेल की तरह नीति अपनानी होगी, जिन्होंने १९७२ में बर्लिन ओलंपिक में फिलिस्तीनी आतंकवादियों ने उनके ११ एथलीटों को मौत के घाट उतर दिया था। इसके बाद इस्रायेल ने उस आतंवादी गुट में शामिल एक भी आतंकियों को नही छोड़ा और उनसे जुड़े सभी लोगों चुन-चुनकर मारा। इस अभियान को इस्रायेल ने लगातार बीस साल तक चलाया। आतंकियों के मांड में घुसकर उनका सफाया किया। उन आतंकियों में एक-दो फरार हैं, अभी भी इस्रायेल के गुप्तचर विभाग उसकी खोजबीन कर रहा है। हमारे राजनेताओं को बयानबाजी करने के बजाय इस्रायेल की तरह आतंकियों के मांद में घुसकर उसको nestnaabut करना होगा तभी आतंकवाद को khatm किया ja s…