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छत्तीसगढ़ के बस्तर के असली मोगली "चंद्रू"
एक  गुमनाम नायक की सच्ची कहानी

(फोटो) चीता (टाइगर) के साथ खेलता हुआ चंद्रू 






(फोटो)  चंद्रू  अब इस  तरह अपने घर में.


विशेष :-बचपन से चीता के साथ खेलने वाले बस्तर के चंद्रू पर फिल्म 1950 -55 के दरम्यान कभी बनी थी। इसे एक स्वीडिश फ़िल्मकार ने बनाई थी. उस समय इस फिल्म को कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिले थे. दुनियाभर में बस्तर और बस्तर का एक अनजान छः-सात साल का चंद्रू रातो-रात स्टार बन गया था. लेकिन जल्दी ही उसे भुला दिया गया. फिल्म निर्माण के करीब 40 -45 साल बाद नब्बे के दशक में वरिष्ठ पत्रकार केवल कृष्ण नें देशबंधु में विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित कर उसे गुमनामी से बाहर निकाला था। चंद्रू फिर कुछ दिनों तक चर्चा में रहा,  फिर भुला दिया गया.  चन्द्रू आज वृद्ध है और वैसे ही जी रहा है जैसे एक आम बस्तरिया आदिम। पता चला कि पिछली बारिश में उसका घर भी बह गया था.....उसकी गुमनामी की तरह।            
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  भारत ने एशियाई खेलों में पदकों का बनाया रिकार्ड
कामनवेल्थ गेम्स के बाद अब भारत ने एशियन गेम्स में भी मेडल्स का रिकार्ड बना दिया है। अपने इवेंट्स के आखिरी दिन भारत ने 4 गोल्ड, 3 सिल्वर और 4 ब्रांज समेत कुल 11 मेडल्स जीते। इसके साथ ही भारत ने इस एशियन गेम्स में 64 मेडल्स जीतकर नया रेकार्ड बना दिया। हालांकि वह किसी भी एशियन गेम्स में सबसे ज्यादा गोल्ड मेडल जीतने के रिकार्ड से 2 कदम दूर रह गया। 1951 में दिल्ली में हुए पहले एशियन गेम्स में भारत ने 15 गोल्ड मेडल जीते थे। इस तरह से भारत 16वें एशियन गेम्स में टाप 6 में जगह बनाने में कामयाब हो गया। भारत ने शुक्रवार को 4 गोल्ड, 3 सिल्वर और 4 ब्रांज समेत कुल 11 मेडल्स जीते। इसके साथ ही भारत की कुल मेडल्स की संख्या 64 हो गई। यह भारत का अब तक का यह सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।
 भारत ने इस एशियन गेम्स में 14 गोल्ड, 17 सिल्वर और 33 ब्रांज मेडल जीते।
इससे पहले भारत ने नई दिल्ली में 1982 में हुए 9वें एशियाई खेलों में 13 गोल्ड मेडल समेत 57 मेडल्स जीते थे। लेकिन भारत ने यहां पर 64 मेडल्स जीतकर नया रेकार्ड्स बना दिया। भारत ने हालांकि किसी एक एशियाई खेलों मे…
  क्रिकेट का मिथक बन गए हैं सचिन
शंकर चंद्राकर क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर पर अब कुछ भी लिखना शायद सूरज को दीया दिखाने के समान है। फिर भी उनके बारे में जितना ज्यादा लिखो कम ही है। रिकार्डों का यह बादशाह अब उस ऊंचाई पर पहुंच चुका है कि उनका हरेक रन एक नए रिकार्ड को जन्म दे देता है। छोटे कद के इस महान खिलाड़ी के नाम अब इतने विश्व रिकार्ड दर्ज हो चुके हैं कि अब एक तरह से वे क्रिकेट का मिथक बन गए हैं। आस्ट्रेलिया के सार्वकालिक क्रिकेटर सर डॉन ब्रेडमैन के बाद दूसरे नंबर पर सिर्फ सचिन का नाम लिया जाता था। लेकिन ग्वालियर वनडे में दोहरे शतक का विश्व कीर्तिमान स्थापित करने के बाद तो पूरी दुनियाभर के दिग्गज क्रिकेटर व क्रिकेटप्रेमी मानने लगे हैं कि अब सचिन अपने आदर्श डॉन ब्रेडमैन से कहीं कोसों आगे निकल गए हैं और वे निर्विवाद सार्वकालिक क्रिकेटर हो गए हैं। 36 की उम्र में जब खिलाड़ी रिटायर होकर घर बैठ जाते हैं तब सचिन के खेल में और भी निखार आना किसी चमत्कार से कम नहीं है। उनका आत्मविश्वास और क्रिकेट के प्रति जूनून काबिल-ए-तारीफ है। शायद इसी गुण ने उनको क्रिकेट का भगवान बना दिया है। उ…
अब सबक ले लें शिवसेना


शिवसेना के विरोध के बावजूद शाहरुख खान की नई फिल्म ‘माई नेम इज खान’ आज मुंबई के सभी सिनेमाघरों में रिलीज हो गई। देशभर में पहले ही दिन फिल्म के हाउसफुल ने शिवसेना के विरोध को नकार दिया। अब समय आ गया है कि शिवसेना ओछी क्षेत्रवाद व विरोध की अपनी राजनीति से तौबा कर सबक ले लें। यदि शिवसेना अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए इसी तरह लोगों की भावनाओं व देश की एकता को भड़काने वाली राजनीति करती रही और मराठी व गैरमराठीवाद का कार्ड खेलती रही तो एक दिन उसे अपना अस्तित्व बचाना मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि अब जनता उसकी राजनीतिक चाल समझ चुकी है। उसे अन्य राज्य तो दूर महाराष्ट्र में ही मुंह की खानी पड़ेगी। अभी भी मौका है शिवसेना के नेतागण इस बात को समय रहते समझ जाए और जनता के विकास की राजनीति करे। देश व देश के लोगों से प्यार करना सीखे। तभी जनता उसे सिर आंखों पर बैठाएगी। अब तो महाराष्ट्र के लोग ही उनका विरोध करने लगे हैं। अनेकता में एकता ही भारत की दुनिया में विशेषता है। यह बात शिवसैनिकों को समझ लेना चाहिए। विरोध जरूर हो, लेकिन वह देशहित में हो। कभी भी अपने फायदे के लिए विरोध करना, लोगों…

बकअप राहुल... शाबाश.. !!!

शाबाश राहुल !!! आपने शिवसैनिकों की धमकियों के बावजूद मुंबई में एक आम मुंबईकर की तरह सड़कों और लोकल ट्रेन में सफर कर मुंबई के शेरों को उनके ही मांद में दुबकने पर मजबूर कर दिया। वाकई में आप आम युवाओं के आदर्श हो सकते हैं। आपने भारतवासियों को संदेश दे दिया कि मुंबई हम सब की है और किसी की गीदड़ धमकी से डरने की जरूरत नहीं। ऐसा ही काम आज सभी मुंबईकर व आम लोगों को करने की जरूरत है। उनके स्वागत में उमड़ी आमलोगों व युवाओं की भीड़ ने भी संदेश दे दिया कि मुंबई किसी की जागीर नहीं है, हम सब भारतवासियों की है। राहुल के एक ही हौसले से शिवसैनिक व महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना आज बैकफुट पर आ गई। उनके नेता रुआंसे होकर यह कहने पर मजबूर हुए कि राहुल का हमने सैद्धांतिक विरोध किया। शाहरुख खान के मामले में भी शिवसैनिक के नेता नरम हो गए। उन्होंने टाकीज मालिकों को शाहरुख की नई फिल्म ‘माइ नेम इज खान’ के प्रदर्शन पर रोक लगाने संबंधी किसी भी तरह की धमकी देने से साफ इंकार कर दिया। यह सब हुआ राहुल गांधी के एक साहस से। यही साहस सभी भारतवासियों व आम लोगों में होने की जरूरत है।

आखिर ये देश किसका है????????

इन दिनों महाराष्ट्र में जो घटित हो रहा है, उसे देखकर दिल कचोटता है। शिवसेना व महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने वहां मराठी-गैरमराठी और भाषावाद का जो मुद्दा बनाया है। वह किसी भी सच्चे देशवासियों को बर्दाश्त नहीं होगा। मुंबई देश की धड़कन और आर्थिक राजधानी है। विश्व में समृद्ध शहर के रूप में उसकी एक पहचान है। मुंबई पूरे भारतवासियों की है और उस पर सभी भारतीयों को गर्व है। आखिर अपनी राजनीतिक रोटी सेकने के लिए शिवसेना और महाराष्ट्र वन निर्माण सेना के नेता देश को बांटने वाले मुद्दों को इस तरह क्यों उछालते रहते रहते हैं? जिस तरह पाकिस्तान के हुक्मरान आजादी के बाद से अपनी राजनीति चलाने के लिए भारत विरोधी अभियान चलाए रहते हैं। वही काम यहां शिवसेना व उनके अनुषंगी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेतागण कर रहे हैं। वे भी यहां अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए समय-समय पर देश को बांटने वाले मुद्दा उछालते रहते हैं। दोनों में कोई फर्क नजर नहीं आता। उनके इन गैरजरूरी मुद्दों को प्रिंट व इलेक्ट्रानिक मीडिया भी जिस तरह सनसनी की तरह पेश करते हैं। वह भी सोचनीय है। खबर बेचने के चक्कर में मीडिया उन्हें हीरो की तरह पेश …